भूलने का अधिकार

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक अंतरिम आदेश में, Google और भारतीय कानून वेबसाइट को भारतीय मूल के एक अमेरिकी नागरिक जोरावर सिंह मुंडी से संबंधित एक निर्णय को हटाने का निर्देश देते हुए ‘भूलने के अधिकार’ को मान्यता दी।
  • गौरतलब है कि जोरावर सिंह ने दलील दी थी कि उसे एक केस में 2013 में बरी कर दिया गया था परन्तु गूगल और इंडियन कानून वेबसाइट पर अभी भी यह फैसला दिख रहा है जिससे नौकरी पाने के उसके प्रयास धूमिल होते जा रहे हैं।

भूल जाने का अधिकार क्या है  ?

  • भूलने का अधिकार, के इंटरनेट पर उपलब्ध किसी व्यक्ति निजी डेटा के भ्रामक, अप्रासंगिकता को सीमित करने, हटाने या सही करने की क्षमता को संदर्भित करता है।
  • यह किसी व्यक्ति द्वारा अनुरोध किये जाने पर उसकी व्यक्तिगत जानकारी को वैध रूप से हटाने की अनुमति देता है।
  • भूल जाने के अधिकार को यूरोपीय संघ में जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) के तहत एक वैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, और यूनाइटेड किंगडम और यूरोप में कई अदालतों द्वारा इसे बरकरार रखा गया है।

भारत के संदर्भ में भूल जाने का अधिकार

विधायी दृष्टिकोण

  • भारत में भूल जाने के अधिकार से संबंधित कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। हालांकि, पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 2019 ने इस अधिकार को मान्यता दी।
  • बिल की धारा 20 ने एक व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत डेटा के निरंतर प्रकटीकरण को प्रतिबंधित करने या रोकने का अधिकार दिया है।
  • किसी व्यक्ति से संबंधित डेटा के प्रकटीकरण की आवश्यकता न रह गई हो या डेटा के उपयोग करने की सहमति वापस ले ली गई हो तब ऐसी स्थितियों मे भूल जाने का अधिकार लागू होगा।

न्यायिक दृष्टिकोण :

  • जबकि व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक अभी तक एक कानून नहीं बन पाया है, अदालतों ने इस अधिकार पर अंतरराष्ट्रीय न्यायशास्त्र को ध्यान में रखते हुए अपने निर्णयों में भूल जाने के अधिकार को स्पष्ट रूप से मान्यता दी है।
  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा कि महिलाओं से जुड़े सामान्य और अति संवेदनशील मामले जो संबंधित व्यक्ति की शालीनता तथा प्रतिष्ठा को प्रभावित करते है, में भूल जाने के अधिकार का पालन किया जाना चाहिये।
  • ओडिशा उच्च न्यायालय ने नवंबर 2020 में इंटरनेट पर अश्लील वीडियो या तस्वीर डाले जाने पर बड़ी बात कही कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को इंटरनेट से ऐसी सामग्रियों को हमेशा के लिए हटवाने का अधिकार मिलना चाहिए कोर्ट ने इसके लिए कानूनी प्रावधान करने का सुझाव दिया और कहा कि इसे निजता का अधिकार माना जा सकता है।

आगे की राह :

  • सर्वप्रथम एक ऐसा कानून बनाने की आवश्यकता है जो भूल जाने के अधिकार को मान्यता दे।
  • व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा का अधिकार (भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत) तथा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की जानकारी की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19 के तहत) के बीच एक संतुलन होना चाहिये।
  • भुला दिए जाने के अधिकार की संकीर्ण व्याख्या (Narrow Interpretation) की जानी चाहिए ताकि यह मानहानि कानून का शॉर्टकट न बन जाए
भूलने का अधिकार

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