प्रवासी मज़दूरों पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

प्रवासी मज़दूरों पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को 31 जुलाई 2021 तक एक नेशन, एक राशन कार्ड’ योजना लागू करने का आदेश दिया। इसी के साथ ही सर्वोछ्क न्यायालय द्वारा प्रवासी मजदूरों के सन्दर्भ में केंद्र सरकार से राज्यों को अतिरिक्त अनाज आवंटित करने का निर्देश दिया है ताकि राज्य सरकारें प्रवासियों को सूखा राशन वितरण के लिए कोई योजना ला सके।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की है सुनवाई

  • विदित हो कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोरोना महामारी की वजह से लगाये गये लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को हो रही समस्याओं पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई, 2021 को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त की थी और प्रवासी मजदूरों के पंजीकरण पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उन प्रवासी श्रमिकों की पूरी सूची तैयार करने का आदेश दिया था जो अपने राज्य में पहुंच गए हैं।

सरकारी प्रयास

  • वर्ष 2020 में अंतर-राज्यीय प्रवासी मजदूरों की परिभाषा को विस्तार देने का फैसला किया है जिससे भविष्य में सामाजिक सुरक्षा के लाभ से कोई भी वंचित न रह पाए।
  • गौरतलब है कि इस कदम के बाद ऐसे मजदूर जिनकी मासिक आय 18 हजार से कम है और वो किसी दूसरे राज्य जाकर सीधे तौर पर या स्व-रोजगार करते हैं तो उसे सरकार की नई परिभाषा के तहत माना जाएगा।
  • पहली बार प्रवासी मजदूरों को परिभाषित करने के लिए आय का इस्तेमाल किया गया।
  • श्रम पर बनी संसद की स्टैंडिंग कमिटी ने प्रवासी मजूदरों के लिए आय में बदलाव और स्व-रोजगार वाले प्रवासियों को शामिल करने की सिफारिश की थी।

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