नैनो यूरिया लिक्विड (Nano Urea Liquid)

नैनो यूरिया लिक्विड (Nano Urea Liquid)

हाल ही में इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर र्कोपरेटिव लिमिटेड या आई.एफ.एफ.सी.ओ.(इफ्को) ने भारतीय कृषि तकनीक में नैनो तरल यूरिया की खोज करने में सफलता पायी। इस नई खोज से कृषि का रूपांतरण होने के साथ-साथ कृषि उत्पादन बढ़ेगा, पानी की खपत कम होगी, प्रदूषण घटेगा एवं केंद्र द्वारा यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी में बचत होगी। विदित हो कि  भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) ने विश्व का पहला नैनो यूरिया लिक्विड उर्वरक तैयार किया है।

नैनो तकनीक क्या है ?

गौरतलब है कि यह तकनीक अणु और परमाणु के स्तर पर काम करती है। यह छोटे कणों को इस प्रकार से डिजाइन करती है कि वे उच्च सतह द्रव्यमान अनुपात पर काम करते हैं, और पौधों में पोषण की संतुलित मात्रा पहुँचा देते हैं।

नैनो यूरिया के लाभ

  • इसके उपयोग से यूरिया के अत्याधिक उपयोग पर रोक लगेगी।
  • इसके प्रयोग से मृदा स्वास्थ में सुधार होगा।
  • इस प्रणाली में जल का सीमित प्रयोग होगा।
  • यह यूरिया अपनी प्रकृति में काफी किफायती है जिससे किसानों की लागत कम होगी।
  • इस यूरिया के प्रयोग से पारिस्थितिकी प्रदूषण कम होगा। नैनो यूरिया से अपेक्षाकृत कम प्रदूषण होता है।
  • विदित हो कि इस यूरिया के इस्तेमाल से किसानों के पैदावार में 8% की वृद्धि हो सकती है।

नैनो यूरिया लिक्विड क्या है

  • विदित हो कि यह  यूरिया के परंपरागत विकल्प के रूप में पौधों को नाइट्रोजन प्रदान करने वाला एक तरल पोषक तत्व है।
  • नैनो यूरिया को पारंपरिक यूरिया के स्थान पर विकसित किया गया है और यह पारंपरिक यूरिया की आवश्यकता को न्यूनतम 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है।
  • इसकी 500 मिली. की एक बोतल में 40,000 मिलीग्राम / लीटर नाइट्रोजन होता है, जो सामान्य यूरिया के एक बैग/बोरी के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्त्व प्रदान करेगा।
  • परंपरागत यूरिया पौधों को नाइट्रोजन पहुँचाने में 30-40% प्रभावी है, जबकि नैनो यूरिया लिक्विड की प्रभावशीलता 80% से अधिक है।

भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO)

  • भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) भारत की सबसे बड़ी सहकारी समितियों में से एक है जिसका पूर्ण स्वामित्व भारतीय सहकारी समितियों के पास है।
  • गौरतलब है कि वर्ष 1967 में केवल 57 सहकारी समितियों के साथ इसकी स्थापना की गई थी, वर्तमान में यह 36,000 से अधिक भारतीय सहकारी समितियों का एक सम्मेलन है, जिसमें उर्वरकों के निर्माण और बिक्री के मुख्य व्यवसाय के अतिरिक्त सामान्य बीमा से लेकर ग्रामीण दूरसंचार तक विविध व्यावसायिक हित निहित हैं।

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